Rakesh Kumar
अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के बाद शव की पहचान में ऐसी गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिसने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पोस्टमॉर्टम के बाद मृतक के परिजनों को उनके स्वजन के शव के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति का शव सौंप दिया गया। परिजन उस शव को लेकर अंतिम संस्कार के लिए श्मशानघाट तक पहुंच गए। वहां दाह संस्कार शुरू होने के बाद जब अस्पताल प्रशासन और पुलिस को गलती का पता चला, तब तक शव का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा जल चुका था। घटना की जानकारी मिलते ही श्मशानघाट पर अफरातफरी मच गई। पानी डालकर दाह संस्कार रोकने का प्रयास किया गया। मामले को लेकर पीड़ित परिजनों ने मगध मेडिकल थाने में अस्पताल कर्मियों के खिलाफ लिखित शिकायत दी है।
सड़क हादसे में घायल हुए थे विगन दास
परिजन सुनील कुमार के अनुसार, गुरारू थाना क्षेत्र के वर्मा गांव के पास शुक्रवार को सड़क हादसे में विगन दास गंभीर रूप से घायल हो गए थे। स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए मगध मेडिकल अस्पताल रेफर किया गया। शुक्रवार को ही उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान रात करीब आठ बजे उनकी मौत हो गई। अस्पताल कर्मियों ने परिजनों को बताया कि शनिवार को शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। शनिवार सुबह शव को पोस्टमार्टम हाउस ले जाया गया। आरोप है कि पोस्टमॉर्टम के बाद पहचान की समुचित प्रक्रिया पूरी किए बिना परिजनों को किसी दूसरे व्यक्ति का शव सौंप दिया गया।
चेहरा देखते ही परिजनों ने पहचान से किया इनकार
सुबह से पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर शव मिलने का इंतजार कर रहे परिजनों ने जैसे ही शव का चेहरा देखा, उन्हें शक हुआ। उन्होंने शव को अपना स्वजन मानने से इनकार कर दिया और अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का कहना था कि गांव में अंतिम दर्शन के लिए 200 से अधिक लोग घर पर इंतजार कर रहे थे। अस्पताल की लापरवाही के कारण उन्हें बेहद पीड़ादायक स्थिति का सामना करना पड़ा।
श्मशानघाट पहुंच चुका था दूसरा शव, 75 फीसदी जलने के बाद रुका दाह संस्कार
मामला बिगड़ने के बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने श्मशानघाट से संपर्क कर दूसरे शव का दाह संस्कार रोकने का प्रयास किया। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी। श्मशानघाट पर ले जाए गए शव का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा जल चुका था। पुलिस और परिजनों के पहुंचने के बाद पानी डालकर दाह संस्कार रोका गया। इसके बाद पूरे मामले को लेकर अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे।
लावारिस शवों के दाह संस्कार की राशि को लेकर भी उठे सवाल
अस्पताल सूत्रों का दावा है कि लावारिस शवों के दाह संस्कार के एवज में मिलने वाली राशि को लेकर पहले भी शवों के प्रबंधन में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि, इस मामले में इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। घटना के बाद शवों की पहचान, पोस्टमॉर्टम हाउस में रिकॉर्ड संधारण और परिजनों को शव सौंपने की प्रक्रिया की निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पहले भी शवों की बदइंतजामी को लेकर सुर्खियों में रहा मेडिकल अस्पताल
मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में शवों की बदइंतजामी का मामला पहले भी सामने आता रहा है। पूर्व में मर्चरी में शवों को कई दिनों तक रखने और शवों को चूहों द्वारा क्षतिग्रस्त किए जाने जैसी घटनाओं को लेकर भी अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ चुके हैं। ताजा घटना ने एक बार फिर शवों की पहचान और सुरक्षित सुपुर्दगी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कॉलेज प्रशासन ने कहा—जांच के बाद होगी कार्रवाई
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. पीके अग्रवाल ने फोन पर कहा कि मामला सीधे अस्पताल से संबंधित नहीं, बल्कि कॉलेज प्रशासन के अधीन है। उन्होंने बताया कि शव को समय पर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया था। वहीं कॉलेज की प्राध्यापिका सह प्राचार्य डॉ. लता शुक्ला द्विवेदी ने कहा कि पोस्टमॉर्टम के बाद सही पहचान सुनिश्चित करने के बाद ही शव परिजनों को सौंपने का सख्त प्रावधान है। शव सौंपते समय जिम्मेदार कर्मचारी की मौजूदगी भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है और निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।