Rakesh Kumar
पितृपक्ष मेला-2026 शुरू होने से पहले बिहार पर्यटन विभाग की ओर से जारी ऑनलाइन ई-पिंडदान और विशेष पर्यटन पैकेज को लेकर विवाद गहरा गया है। बुधवार को गयापाल समाज एवं 14 सैया गयापाल समिति ने विष्णुपद मंदिर परिसर में संयुक्त प्रेसवार्ता कर इस व्यवस्था का कड़ा विरोध किया। पंडा समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि पिंडदान पर्यटन गतिविधि नहीं, बल्कि सनातन आस्था, पितृऋण और मोक्ष से जुड़ा धार्मिक अनुष्ठान है। इसे ऑनलाइन सेवा या व्यावसायिक पैकेज का रूप देना धार्मिक परंपरा की मर्यादा के अनुरूप नहीं है।
समिति के संरक्षक महेश लाल गुप्त ने कहा कि शास्त्रीय परंपरा के अनुसार पिंडदानी की स्वयं गयाजी में उपस्थिति महत्वपूर्ण है। घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से पिंडदान कराने का कोई शास्त्रीय विधान नहीं है। उन्होंने निजी वेबसाइटों, होटलों और पर्यटन पैकेजों के जरिए 25 हजार से 51 हजार रुपये तक वसूले जाने पर भी आपत्ति जताई। पंडा समाज का कहना था कि पिंडदान को पैकेज में शामिल करने से धार्मिक अनुष्ठान के स्वरूप और पवित्रता पर असर पड़ेगा।
गयापाल पुरोहितों ने अपनी पारंपरिक वेदियों और बही-खाता व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि पीढ़ियों से पुरोहित परिवार श्रद्धालुओं के कुल और पारिवारिक इतिहास का रिकॉर्ड सुरक्षित रखते आ रहे हैं। कई परिवारों की सात से दस पीढ़ियों तक की जानकारी बही-खातों में दर्ज है। होटल या अन्य स्थानों पर पिंडदान की व्यवस्था होने से गयाजी की पारंपरिक 54 वेदियों और गयापाल पुरोहितों की ऐतिहासिक भूमिका प्रभावित होगी। राजेंद्र सिजुआर एवं महेश लाल गुप्त ने कहा कि सरकार को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अन्य व्यवस्थाएं करनी चाहिए, लेकिन धार्मिक कर्मकांड को पर्यटन कारोबार का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।
पंडा समाज ने सरकार से ऑनलाइन ई-पिंडदान और पिंडदान से जुड़े पर्यटन पैकेज के प्रावधानों पर तत्काल पुनर्विचार कर निर्णय वापस लेने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि मांग पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन के साथ कानूनी रास्ता भी अपनाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर न्यायालय में रिट याचिका दायर की जाएगी।