Rakesh Kumar
पिंडदान की धरती गयाजी को धार्मिक पर्यटन के अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार ने दो बड़ी योजनाओं का खाका तैयार किया है। पर्यटन विभाग ने विष्णुपद मंदिर क्षेत्र को वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित करने तथा सोन नदी के पानी को फल्गु नदी तक पहुंचाने वाली योजना के लिए प्रशासनिक स्वीकृति का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। विभागीय दस्तावेज के अनुसार दोनों योजनाओं की प्राक्कलित लागत 26,016.05 करोड़ रुपये है।
विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए 25,020 करोड़ रुपये तथा सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना के लिए 996 करोड़ पांच लाख रुपये का प्राक्कलन तैयार किया गया है। पर्यटन विभाग ने सरकार को बताया है कि विष्णुपद मंदिर ऐतिहासिक, पौराणिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। पितृपक्ष के अलावा पूरे वर्ष देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर से घाट तक बदलेगा पूरा परिदृश्य
प्रस्तावित विष्णुपद कॉरिडोर को केवल मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रखा गया है। योजना में मंदिर परिसर के विकास के साथ मल्टीलेवल कार पार्किंग, एलीवेटेड पथ, रैम्प, घाट, डोरमेट्री, कैंटीन और पैदल पुल बनाने का प्रस्ताव है।
इसके अलावा मनसरवा, मानपुर ब्रिज, स्टैच्यू, पीएफसी सीताकुंड, सार्वजनिक सुविधाओं और आंतरिक सुविधाओं के विकास समेत निर्माण-पूर्व और अन्य सहायक कार्य भी कराए जाने हैं। योजना का क्रियान्वयन बिहार राज्य पथ विकास निगम के माध्यम से प्रस्तावित है।
फल्गु को मिलेगा सोन का सहारा
गयाजी के धार्मिक महत्व से सीधे जुड़ी फल्गु नदी के लिए भी बड़ी योजना प्रस्तावित है। सोन-फल्गु नदी जोड़ परियोजना के तहत इंद्रपुरी बैराज से करीब 23 किलोमीटर अपस्ट्रीम में इनटेक वेल बनाने की योजना है। यहां से सोन नदी का पानी उठाकर करीब 11 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए उत्तर कोयल मुख्य नहर के लगभग 32.77 किलोमीटर बिंदु तक पहुंचाया जाएगा।
इसके बाद सोन का पानी उत्तर कोयल दायां मुख्य नहर के रास्ते प्रवाहित होकर फल्गु नदी तक पहुंचेगा। योजना का उद्देश्य फल्गु नदी में जल उपलब्धता बढ़ाने के साथ गयाजी के धार्मिक महत्व को और मजबूत करना है।
पिंडदान की परंपरा को मिलेगा नया आधार
पर्यटन विभाग का मानना है कि दोनों योजनाओं के पूरा होने के बाद गयाजी की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी। खासकर पिंडदान, तर्पण और पितृपक्ष जैसी हजारों वर्ष पुरानी परंपराओं को आधुनिक सुविधाओं का आधार मिलेगा।
विष्णुपद क्षेत्र का नियोजित विकास और फल्गु में जल उपलब्धता बढ़ने से श्रद्धालुओं की सुविधा के साथ स्थानीय स्तर पर पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
35,016 करोड़ के दावे पर तस्वीर साफ होना जरूरी
पर्यटन विभाग के नाम पर सामने आए विवरण में दोनों योजनाओं के लिए करीब 35,016 करोड़ रुपये का उल्लेख किया गया है, जबकि उसी विवरण में विष्णुपद कॉरिडोर की लागत 25,020 करोड़ और सोन-फल्गु योजना की लागत 996.05 करोड़ रुपये दी गयी है। इन दोनों आंकड़ों का कुल योग 26,016.05 करोड़ रुपये होता है। ऐसे में 35,016 करोड़ रुपये के आंकड़े की आधिकारिक स्तर पर पुष्टि और स्पष्टीकरण जरूरी है।