Rakesh Kumar
गुरुआ प्रखंड के नवाबचक गांव में तालाब में डूबने से दो 13 वर्षीय सहेलियों की मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। चौधरी और यादव परिवार की दोनों बेटियां सुप्रिया कुमारी और सुहानी कुमारी आपस में गहरी दोस्त थीं। स्कूल से लौटने के दौरान हुए हादसे में दोनों की जान चली गई। इसके बाद दोनों परिवारों ने जातीय भेदभाव से ऊपर उठकर अपनी बेटियों की दोस्ती को अंतिम सम्मान दिया और दोनों को एक ही कब्र में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया। अंतिम विदाई का यह दृश्य देखकर ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।
पैर धोने के दौरान हुआ हादसा
नवाबचक गांव निवासी मनोज चौधरी की 13 वर्षीय पुत्री सुप्रिया कुमारी और अमरेन्द्र यादव की 13 वर्षीय पुत्री सुहानी कुमारी रोज की तरह स्कूल गई थीं। स्कूल से घर लौटने के दौरान दोनों तालाब के किनारे रुक गईं। दोनों तालाब में पैर धो रही थीं। इसी दौरान एक बच्ची का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चली गई। सहेली को डूबता देख दूसरी बच्ची उसे बचाने के लिए पानी में उतर गई। देखते ही देखते दोनों गहरे पानी में समा गईं।
एक-दूसरे को बचाने में चली गई दोनों की जान
हादसे की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग तालाब की ओर दौड़े। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद दोनों बच्चियों को पानी से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। दो मासूम सहेलियों की मौत की खबर मिलते ही दोनों परिवारों में चीख-पुकार मच गई। देखते ही देखते पूरे गांव में मातम छा गया।
जाति से ऊपर उठकर निभाई दोस्ती
दोनों बच्चियों की अंतिम विदाई के दौरान इंसानियत और दोस्ती की अनूठी मिसाल देखने को मिली। एक बच्ची चौधरी परिवार से थी तो दूसरी यादव परिवार से। अलग-अलग जातियों से होने के बावजूद दोनों परिवारों ने बेटियों की दोस्ती को जातीय पहचान से ऊपर रखा। परिजनों और ग्रामीणों की सहमति से दोनों सहेलियों को एक ही कब्र में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
दोनों मासूमों की एक साथ अंतिम विदाई ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। जिस दोस्ती ने स्कूल से घर लौटने तक दोनों का साथ नहीं छोड़ा, उसी दोस्ती को परिवारों ने मौत के बाद भी जिंदा रखते हुए उन्हें एक ही कब्र में आखिरी ठिकाना दिया। घटना के बाद से नवाबचक गांव में यही दोस्ती और इंसानियत चर्चा का विषय बनी हुई है।