Rakesh Kumar
दिल्ली/गया। राज्यसभा सदस्य और बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने कहा कि धर्म और विज्ञान कभी अलग नहीं रहे हैं। बाद के दौर में दोनों को अलग करके देखने की कोशिश की गई, जो उचित नहीं है। वह शुक्रवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में फ्यूचर पॉइंट और ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ एस्ट्रोलाजर्स सोसाइटी की ओर से विकसित एआई आधारित ज्योतिष सॉफ्टवेयर के शुभारंभ समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि ज्योतिष में एआई का सदुपयोग होना चाहिए और इसका इस्तेमाल विशेषज्ञों द्वारा ही किया जाना चाहिए।
फ्यूचर पॉइंट के अध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार बंसल ने कहा कि अगले पांच से दस वर्षों में एआई ज्योतिष का स्वरूप बदल सकता है। लाखों कुंडलियों के अध्ययन से भविष्य के आकलन में मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि इस्कॉन वृंदावन में प्रस्तावित भक्ति वेदांत विश्वविद्यालय में 2027 से एआई और वैदिक ज्योतिष में बीटेक की पढ़ाई शुरू कराने की योजना है। फ्यूचर पॉइंट के उपाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार सिन्हा ने कहा कि एआई ज्योतिष शोध में मददगार होगा और अलग-अलग गणनाओं से पैदा होने वाले संशय को कम कर सकता है।
समारोह में आचार्य अनिल वत्स, प्रो. दिवाकर दत्त शर्मा, जीडी वशिष्ठ, आचार्य रघुनाथ और जयप्रकाश शर्मा समेत कई विद्वानों ने एआई को ज्योतिष के लिए उपयोगी बताया, लेकिन इसके इस्तेमाल में विशेषज्ञता और मानवीय विवेक को जरूरी बताया।