Rakesh Kumar
गया जी । बदलते युद्धक्षेत्र में अब सिर्फ बंदूक और बारूद ही सैन्य ताकत का आधार नहीं रह गए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, साइबर, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सिमुलेटर जैसी अत्याधुनिक तकनीकें भी युद्ध की दिशा तय कर रही हैं। इसी बदलती सैन्य जरूरत के अनुरूप ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, गया ने अपने प्रशिक्षण का स्वरूप भी आधुनिक किया है। यहां कैडेट्स को शारीरिक, मानसिक, नैतिक और नेतृत्व क्षमता के साथ भविष्य की मल्टी-डोमेन लड़ाई के लिए तकनीकी रूप से दक्ष बनाया जा रहा है।
ओटीए गया में 4 और 5 सितंबर को 29वीं पासिंग आउट परेड से जुड़े कार्यक्रम होंगे। 4 सितंबर को मल्टी एक्टिविटी डिस्प्ले और 5 सितंबर को भव्य पासिंग आउट परेड आयोजित की जाएगी। इस बार अकादमी में प्रशिक्षण पूरा करने वाले 254 कैडेट्स सैन्य अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त करेंगे। इनमें 219 पुरुष और 35 महिला कैडेट्स शामिल हैं।
ड्रिल से हथियार प्रशिक्षण तक, उत्कृष्ट कैडेट्स हुए सम्मानित
पासिंग आउट परेड से पहले मंगलवार को ओटीए सभागार में कमांडेंट अवार्ड सेरेमनी आयोजित की गई। इसमें ड्रिल, फिजिकल ट्रेनिंग, हथियार प्रशिक्षण, सर्विस सब्जेक्ट्स और अकादमिक क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को सम्मानित किया गया।
ओटीए के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल संदीप सिंह ने कैडेट्स का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें सैन्य जीवन की कठिन चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने पूरी लगन, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के साथ देशसेवा के दायित्वों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित किया।
इंजीनियरिंग से सिग्नल्स और इंफैंट्री तक संभालेंगे मोर्चा
5 सितंबर को पास आउट होने वाले कैडेट्स सेना की अलग-अलग शाखाओं में जिम्मेदारी संभालेंगे। इस वर्ष इंजीनियरिंग में 51, इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स में 44, सिग्नल्स में 31 और इंफैंट्री में 32 पुरुष अधिकारी कमीशन प्राप्त करेंगे। 35 महिला अधिकारियों में ईएमई और सिग्नल्स में बड़ी संख्या होगी, जबकि कुछ महिला कैडेट्स इंफैंट्री और इंजीनियरिंग में भी जाएंगी।
पासिंग आउट परेड के दिन बेहतर प्रदर्शन करने वाले कैडेट्स को स्वॉर्ड ऑफ ऑनर, गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल से सम्मानित किया जाएगा। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली कंपनी को चैंपियनशिप बैनर दिया जाएगा।
वियतनाम के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी करेंगे परेड का निरीक्षण
इस बार पासिंग आउट परेड के मुख्य अतिथि एवं निरीक्षी अधिकारी वियतनाम पीपुल्स आर्मी के डिप्टी चीफ ऑफ द जनरल स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल ले वेन हूंग होंगे। उनके अलावा जीओसीसी, सदर्न आर्मी कमान के लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर भी मौजूद रहेंगे। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में 254 कैडेट्स सैन्य जीवन के नए अध्याय में प्रवेश करेंगे।
2024 से बदला प्रशिक्षण का स्वरूप
कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल संदीप सिंह ने बताया कि ओटीए में शुरुआत में टीईएस और एससीओ के तहत दो तरह के प्रशिक्षण की व्यवस्था थी। वर्ष 2024 में प्रशिक्षण का स्वरूप बदला गया और अब यहां शॉर्ट सर्विस कमीशन (टेक्निकल) के तहत प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि अकादमी का उद्देश्य हर वर्ष बीटेक किए हुए 750 छात्रों को शॉर्ट सर्विस कमीशन के लिए प्रशिक्षित करना है। इस वर्ष 5 सितंबर को चौथे शॉर्ट सर्विस कोर्स के कैडेट्स पास आउट होंगे।
एआई से रोबोटिक्स तक, युद्ध की नई तकनीक सीख रहे कैडेट्स
ओटीए कमांडेंट के अनुसार, आने वाले समय की लड़ाई तकनीकी एडवांसमेंट पर अधिक निर्भर होगी। इसी वजह से कैडेट्स को प्रशिक्षण के बुनियादी स्तर से ही एआई, ड्रोन, साइबर, रोबोटिक्स और सिमुलेटर की जानकारी दी जा रही है। उद्देश्य यह है कि भविष्य में जब सेना को बहु-क्षेत्रीय यानी मल्टी-डोमेन ऑपरेशन में उतरना पड़े, तो ये अधिकारी तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल कर सकें।
यह प्रशिक्षण केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं है। ओटीए की ट्रेनिंग कैडेट्स की शारीरिक क्षमता, मानसिक मजबूती, नैतिक मूल्यों और नेतृत्व क्षमता को भी मजबूत करती है। तकनीक और जांबाजी के इस मेल से सेना को भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए तैयार अधिकारी मिलेंगे।
साइबर को भी बनाया जा रहा सैन्य सुरक्षा की ढाल
आधुनिक युद्ध में साइबर हमलों की बढ़ती चुनौती पर कमांडेंट ने कहा कि साइबर एक ऐसा हथियार है, जिसके जरिए बिना पारंपरिक बम का इस्तेमाल किए भी सटीक लक्ष्य को प्रभावित किया जा सकता है। भारतीय सेना में राष्ट्रीय स्तर से लेकर विभिन्न स्तरों पर साइबर एक्सपर्ट और विशेष वर्टिकल काम कर रहे हैं।
ओटीए में भी साइबर, एंटी-साइबर, एआई, एंटी-एआई और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से संबंधित प्रशिक्षण को सिलेबस का हिस्सा बनाया गया है। कैडेट्स को न केवल नई तकनीक के इस्तेमाल, बल्कि संभावित साइबर और तकनीकी खतरों से निपटने के लिए भी तैयार किया जा रहा है।
महिला कैडेट्स भी बढ़ा रहीं सैन्य शक्ति
ओटीए में महिला कैडेट्स को इंफैंट्री आदि को छोड़कर विभिन्न विंग में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कमांडेंट ने कहा कि सेना पुरुष और महिला में कोई भेद नहीं करती। शारीरिक मापदंड में कुछ अंतर प्राकृतिक है, लेकिन देशसेवा और सैन्य जिम्मेदारी निभाने के अवसर समान रूप से उपलब्ध हैं।
फिलहाल अकादमी में 350 पुरुष और 30 महिला कैडेट्स को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था बतायी गई है। आर्मी हेडक्वार्टर की ओर से ओटीए गया की भूमिका और क्षमता को जिस तरह विस्तार दिया जा रहा है, उससे भविष्य में इसकी प्रशिक्षण क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है।
100 से 750 तक पहुंची प्रशिक्षण क्षमता
कमांडेंट ने बताया कि पिछले वर्षों में ओटीए गया की भूमिका और प्रशिक्षण क्षमता में बड़ा विस्तार हुआ है। प्रशिक्षण क्षमता पहले 100 से 400, फिर 488 और अब 750 तक पहुंची है। वर्ष 2024 से ओटीए गया और ओटीए चेन्नई में 750-750 कैडेट्स को प्रशिक्षित करने की व्यवस्था की दिशा में काम किया जा रहा है।
यह विस्तार केवल प्रशिक्षण संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि साधन-संसाधन और तकनीकी बुनियादी ढांचे को भी अपग्रेड किया गया है। ओटीए में आने वाले कैडेट्स पहले से ही कंप्यूटर साइंस, कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल जैसे तकनीकी क्षेत्रों से प्रशिक्षित होते हैं। ऐसे में उनकी तकनीकी दक्षता को सैन्य प्रशिक्षण के साथ जोड़ा जा रहा है।
यानी गया ओटीए अब सिर्फ जांबाज सैन्य अफसर तैयार करने की अकादमी नहीं, बल्कि ऐसी नई सैन्य पीढ़ी तैयार करने का केंद्र बन रहा है, जो साहस और अनुशासन के साथ एआई, ड्रोन, साइबर और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों के सहारे भविष्य के युद्धक्षेत्र में देश की सैन्य शक्ति को नई धार देगी।
(रिपोर्ट :राकेश कुमार /गया जी )