Rakesh Kumar
गया कॉलेज के गर्ल्स हॉस्टल में मेस व्यवस्था, साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर छात्राओं का आक्रोश रविवार को खुलकर सामने आ गया। मेस बंद होने, मेस शुल्क बढ़ाने की तैयारी तथा पेयजल व शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव के विरोध में छात्राएं धरने पर बैठ गईं। छात्राओं का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना के मेस बंद कर दिया गया, जिससे उन्हें भोजन के लिए परेशान होना पड़ा। वहीं हॉस्टल प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए विवाद के लिए छात्राओं के रवैये को जिम्मेदार ठहराया है।
धरने का नेतृत्व कर रही छात्रा ट्विंकल रक्षिता ने कहा कि यह सरकारी हॉस्टल है और कॉलेज खुलने तक मेस की व्यवस्था नियमित रूप से संचालित होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि 22 जून से हॉस्टल खुल चुका है, लेकिन भोजन की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। उनका आरोप है कि बिना किसी लिखित सूचना के मेस शुल्क में 600 रुपये की बढ़ोतरी की बात कही जा रही है, जिसे छात्राएं स्वीकार नहीं करेंगी।
छात्राओं ने हॉस्टल परिसर में व्याप्त गंदगी, शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होने, कई बाथरूम के लंबे समय से बंद रहने तथा पानी की खुली टंकी से दूषित पानी की आपूर्ति जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। उनका कहना है कि इन समस्याओं के कारण कई छात्राओं की तबीयत भी खराब हो चुकी है।
छात्राओं के अनुसार, विरोध स्वरूप भूख हड़ताल शुरू करने के बाद देर रात भोजन तो उपलब्ध कराया गया, लेकिन सभी छात्राओं को केवल एक-एक पूरी देकर औपचारिकता पूरी की गई। उन्होंने हॉस्टल की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए महिला प्राध्यापकों की स्थायी समिति गठित करने की मांग भी की है।
इधर, हॉस्टल के केयरटेकर मनीष प्रताप सिंह ने छात्राओं के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि हॉस्टल में नियमित साफ-सफाई कराई जाती है। उनके अनुसार पहले नियुक्त महिला रसोइया को छात्राओं ने हटवा दिया और बाद में रखे गए पुरुष कुक पर भी झूठे आरोप लगाए गए, जिससे वह नौकरी छोड़कर चला गया। इसी कारण कुछ समय के लिए भोजन व्यवस्था प्रभावित हुई।
केयरटेकर ने बताया कि वर्तमान में 1800 रुपये के मेस शुल्क में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना कठिन हो गया है। गैस की कमी और रसोइए के अचानक काम छोड़ने के कारण मेस संचालन प्रभावित हुआ, लेकिन मेस को स्थायी रूप से बंद नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छात्राएं रसोइयों को काम नहीं करने दे रही हैं और बातचीत के बजाय आंदोलन का रास्ता अपना रही हैं।
फिलहाल गया कॉलेज गर्ल्स हॉस्टल में गतिरोध बना हुआ है। छात्राएं लिखित आश्वासन, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और मेस शुल्क बढ़ाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग पर अड़ी हैं, जबकि कॉलेज प्रशासन बातचीत के माध्यम से विवाद सुलझाने का दावा कर रहा है। अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम और हॉस्टल की व्यवस्था सामान्य होने पर टिकी है।