Rakesh Kumar
भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सत्तारूढ़ एनडीए के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। हिन्दुस्तान आवामी मोर्चा (हम) के संरक्षक एवं केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने न्यायिक जांच पूरी होने से पहले एनकाउंटर को हत्या करार देने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच रिपोर्ट आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
शुक्रवार को सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में मांझी ने कहा कि भरत तिवारी की मौत पुलिस की आत्मरक्षा में हुई या हत्या की नीयत से, इसका पता लगाने के लिए न्यायिक जांच आयोग का गठन किया जा चुका है। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट आने से पहले इसे हत्या बताना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसा होगा।
उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि यदि सरकार में शामिल कुछ लोगों को पहले से ही यकीन है कि यह हत्या का मामला है, तो फिर न्यायिक जांच आयोग की जरूरत ही क्या है। ऐसे में आयोग को भंग कर सीधे संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर देनी चाहिए।
चिराग ने कहा था— यह एनकाउंटर नहीं, हत्या है
मांझी का यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ घंटे पहले ही केंद्रीय मंत्री एवं चिराग पासवान भोजपुर के बिलौटी गांव पहुंचकर भरत तिवारी के परिजनों से मिले थे। मीडिया से बातचीत में चिराग ने कहा था कि यदि कोई व्यक्ति आत्मसमर्पण कर रहा हो तो उसे गोली नहीं मारी जा सकती। उसे गिरफ्तार कर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने इस घटना को एनकाउंटर नहीं बल्कि हत्या बताया और कहा कि दर्ज एफआईआर के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि वह इस मामले पर मुख्यमंत्री से भी बात करेंगे।
एनडीए में अलग-अलग सुर, सियासत तेज
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पहले से विपक्ष सरकार को घेर रहा है। अब एनडीए के दो प्रमुख सहयोगी दलों के नेताओं के अलग-अलग रुख ने इस मामले को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। एक ओर चिराग पासवान घटना को हत्या बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जीतन राम मांझी न्यायिक जांच पूरी होने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बचने की सलाह दे रहे हैं। ऐसे में जांच आयोग की रिपोर्ट आने तक इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
(रिपोर्ट : राकेश कुमार / गया )