Rakesh Kumar
इमामगंज प्रखंड के मंझौली गांव निवासी आइस फैक्ट्री संचालक उमेश साव की शिकायत पर हुई जांच में बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने कनीय अभियंता सहित पांच लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया है।
जानकारी के अनुसार उमेश साव ने जिला पदाधिकारी से शिकायत की थी कि उनकी आइस फैक्ट्री में बिजली विभाग की टीम ने जांच के दौरान टोका फंसाकर मशीन चलाने का आरोप लगाया था। शिकायतकर्ता ने आरोप को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा था कि कनीय अभियंता सचिन कुमार ने मामले को रफा-दफा करने के बदले रुपये की मांग की थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने जांच की जिम्मेदारी शेरघाटी अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपी। जांच के दौरान बिजली विभाग की ओर से फैक्ट्री में टोका लगाकर मशीन चलाने संबंधी कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराया जा सका। वहीं जांच में यह भी सामने आया कि कनीय अभियंता सचिन कुमार ने अपने विभागीय लेखापाल रंजीत कुमार के बैंक खाते में यूपीआई के माध्यम से 20 हजार रुपये मंगवाए थे। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि 50 हजार रुपये नकद भी अवैध रूप से लिए गए थे।
अनुमंडल पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने कनीय अभियंता सचिन कुमार, सहायक अभियंता राजीव झा, लेखापाल रंजीत कुमार, मानव बल संजय पासवान तथा सुपरवाइजर विक्रम सिंह के विरुद्ध विभागीय एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश अधीक्षण अभियंता को दिया है। साथ ही कनीय अभियंता के निलंबन के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजने का आदेश भी दिया गया है।
जांच के दौरान एक लाइनमैन की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई। जिला प्रशासन ने उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है। इस कार्रवाई को बिजली विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
(रिपोर्ट : राकेश कुमार / गया जी )