Rakesh Kumar
गया जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत मंझगांवा गांव में सर्पदंश की एक दर्दनाक घटना सामने आई है। जहरीले सांप के डसने से 24 वर्षीय प्रियंका कुमारी की मौत हो गई। बताया जाता है कि समय पर चिकित्सीय उपचार नहीं मिलने और झाड़-फूंक के भरोसे रहने के कारण महिला की जान नहीं बच सकी। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। मृतका अपने पीछे एक पुत्र और एक पुत्री छोड़ गई हैं, जिनके सिर से मां का साया उठ गया है।
परिजनों एवं ग्रामीणों के अनुसार मंगलवार की शाम प्रियंका कुमारी किसी घरेलू कार्य से घर से बाहर निकली थीं। इसी दौरान उन्हें एक जहरीले सांप ने डस लिया। सर्पदंश के बाद परिवार के लोग उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक कराने के लिए एक स्थानीय तांत्रिक के पास ले गए। करीब एक घंटे तक झाड़-फूंक का सिलसिला चलता रहा, जबकि इस दौरान सांप का जहर उनके शरीर में फैलता गया।
जब प्रियंका की तबीयत लगातार बिगड़ने लगी तो परिजन उन्हें फतेहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, गया रेफर कर दिया। हालांकि अस्पताल पहुंचने से पहले ही महेर के पास रास्ते में उनकी मौत हो गई।
मृतका के निधन के बाद परिवार में कोहराम मच गया है। उनके दोनों छोटे बच्चे मां को याद कर बिलख रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि प्रियंका मिलनसार और सरल स्वभाव की महिला थीं। उनकी असामयिक मौत से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।
जानकारी के अनुसार प्रियंका कुमारी का मायका रघवाचक गांव में है, जबकि उनकी ससुराल मंझगांवा गांव में है। घटना की सूचना मिलते ही दोनों गांवों में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में रिश्तेदार और ग्रामीण पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में झाड़-फूंक और अंधविश्वास पर भरोसा करना जानलेवा साबित हो सकता है। सांप काटने के बाद मरीज को बिना समय गंवाए नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए, जहां एंटी-स्नेक वेनम सहित आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाता है। चिकित्सकों के अनुसार समय पर इलाज मिलने से अधिकांश सर्पदंश पीड़ितों की जान बचाई जा सकती है।
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास के खतरनाक परिणामों को उजागर करती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रियंका को सर्पदंश के तुरंत बाद अस्पताल ले जाया जाता, तो संभवतः उनकी जान बच सकती थी।
(रिपोर्ट : राकेश कुमार / गया जी )