Rakesh Kumar
बाराचट्टी विधायक ज्योति मांझी पर हुए हमले के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने घटना को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आठ दिनों के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी और मोहनपुर थाना के दारोगा पर कार्रवाई नहीं हुई तो कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा।
पुलिस की मानसिकता पर उठाए सवाल
सोमवार को मीडिया से बातचीत में जीतन राम मांझी ने कहा कि उन्होंने इस मामले में डीजीपी से लेकर डीएम तक बात की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिसकर्मियों की मानसिकता अनुसूचित जाति विरोधी है। उन्होंने कहा कि विधायक ज्योति मांझी पर यह पहला नहीं बल्कि आठवां हमला है।
उन्होंने कहा कि “मोहनपुर का दारोगा पता नहीं किस समाज का है, उसका दिमाग एंटी शेड्यूल कास्ट है।”
“गाड़ी में तेल नहीं है” कहकर नहीं दी सुरक्षा
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि विधायक को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि बाराचट्टी थाना से विधायक को स्कॉट मिला था, लेकिन मोहनपुर थाना को सूचना देने पर वहां के थानेदार ने “गाड़ी में तेल नहीं है” कहकर सुरक्षा देने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि पुलिस सुरक्षा नहीं मिलने के कारण ही यह हमला संभव हो सका।
“पुलिस चाहती तो तुरंत गिरफ्तारी हो सकती थी”
जीतन राम मांझी ने कहा कि घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तत्परता से कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस चाहती तो आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर सकती थी, लेकिन जानबूझकर लापरवाही बरती गई।
उन्होंने कहा कि यदि सात दिनों के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो हम पार्टी एनडीए में रहते हुए भी डीएम और एसएसपी आवास का घेराव करेगी।
विधायक ने बताया सुनियोजित हमला
इधर विधायक ज्योति मांझी ने इस घटना को सुनियोजित साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि शनिवार की शाम वह गंभीरा गांव से एक सामाजिक कार्यक्रम से लौट रही थीं। इसी दौरान सिंगल लेन सड़क पर सामने से आ रही गाड़ी को हटाने को लेकर विवाद शुरू हुआ।
विधायक के अनुसार करीब 20 लोगों ने उनके वाहन को घेर लिया और शीशा तोड़ने का प्रयास किया। इस दौरान उनके सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की गई तथा जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए दुर्व्यवहार किया गया।
“अगर नीचे उतरती तो बड़ी घटना हो सकती थी”
ज्योति मांझी ने कहा कि हमलावरों का वाहन पीछे की ओर ले जाया गया, जिससे साफ लग रहा था कि हमला पूर्व नियोजित था। उन्होंने कहा कि यदि वह उस समय वाहन से नीचे उतर जातीं तो बड़ी घटना हो सकती थी।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
सात नामजद समेत 20 अज्ञात पर केस दर्ज
घटना के बाद विधायक की शिकायत पर मोहनपुर थाना में सात नामजद समेत 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मामले के बाद जिले में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है।