Rakesh Kumar
गया जी शहर की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक कचहरी रोड अब "एक्सीडेंट पॉइंट" बन चुका है। बुधवार की शाम सिविल कोर्ट के सामने महज़ एक घंटे के भीतर चार वाहन डिवाइडर से टकरा कर दुर्घटनाग्रस्त हो गए। गनीमत रही कि इस बार कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन सवाल उठता है—क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है?
शहर के बीचोंबीच स्थित यह सड़क हर वक्त चहल-पहल से भरी रहती है। मगध प्रमंडल आयुक्त कार्यालय, समाहरणालय, नगर निगम, एसएसपी ऑफिस और सिविल कोर्ट — सब इसी इलाके में हैं, लेकिन अंधेरे में डूबी सड़कें और बेपरवाह अफसर इस सड़क को मौत के मुहाने पर छोड़ चुके हैं।
अंधेरे में लिपटी व्यस्त सड़क
कचहरी रोड पर स्ट्रीट लाइटें नदारद हैं, और डिवाइडर पर रिफ्लेक्टर तक नहीं लगाए गए। रात के अंधेरे में वाहन चालकों को डिवाइडर दिखता ही नहीं। नतीजा—हर दिन कोई न कोई हादसा।
स्थानीय लोगों का कहना है, “अफसरों के दफ्तर यहीं हैं, लेकिन किसी को जनता की फिक्र नहीं। जब तक किसी बड़े अधिकारी या उनके वाहन का हादसा नहीं होगा, तब तक शायद रोशनी नहीं जलेगी।”
इसी महीने में अंधेरे ने ले ली थी एक जान
यह पहला मामला नहीं है। विगत 17 अक्टूबर को कटारी हिल रोड पर पाम गार्डन के पास एक भीषण ट्रक हादसे में बाइक सवार युवक की मौत हो गई थी, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। सड़क पर घुप अंधेरा और नशे में धुत ड्राइवर—यह घातक मेल हर बार किसी की जिंदगी लील लेता है।
सवाल जनता का — जवाब कौन देगा?
लोगों का कहना है कि नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस सिर्फ दिखावे की कार्रवाई करती है, लेकिन सड़क सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
एक राहगीर ने गुस्से में कहा, “सड़क प्रशासन की नाक के नीचे है, लेकिन आंखों पर अंधेरा छाया है।”
मौत की दस्तक जारी
कचहरी रोड, जहां हर दिन सैकड़ों वाहन गुजरते हैं, अब हादसों का हॉटस्पॉट बन चुका है। सवाल अब यही है —
कितनी जानें जाएंगी, तब जागेगा प्रशासन?
क्या गया की सड़कें अंधेरे में प्रशासन की लापरवाही की बलि चढ़ती रहेंगी?