फल्गु तट पर बनेगा आधुनिक एलपीजी शवदाह गृह, परंपरा और तकनीक का होगा संगम
Rakesh Kumar
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धार्मिक नगरी गया में अंतिम संस्कार व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। फल्गु नदी के पूर्वी तट पर एलपीजी आधारित अत्याधुनिक शवदाह गृह का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना खासकर उन श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होगी, जो पारंपरिक रूप से फल्गु तट पर अंतिम संस्कार के लिए आते हैं।


यह शवदाह गृह मानपुर के भुसुंडा स्थित फल्गु नदी के पूर्वी तट पर बनाया जाएगा। इस परियोजना को लेकर ईशा आउटरीच चैरिटेबल ट्रस्ट और नगर विकास एवं आवास विभाग के बीच एमओयू हस्ताक्षरित किया गया है। इसके तहत गुरुवार को ईशा फाउंडेशन की टीम और गया नगर निगम के नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया।

 

निरीक्षण के बाद परियोजना को लेकर कांट्रैक्ट एग्रीमेंट पर भी हस्ताक्षर किए गए।

नगर आयुक्त अभिषेक पलासिया ने बताया कि इस शवदाह गृह में एलपीजी आधारित आधुनिक और प्रदूषण रहित तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और व्यवस्थित हो सकेगी। उन्होंने कहा कि यहां पारंपरिक धार्मिक विधियों के पालन के बाद एलपीजी के माध्यम से दाह संस्कार किया जाएगा, जिसमें सीमित मात्रा में लकड़ी का उपयोग भी होगा, ताकि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन कायम रहे।


उन्होंने यह भी बताया कि इस नई व्यवस्था से लकड़ी पर निर्भरता कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी। साथ ही, दाह संस्कार की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, स्वच्छ और सम्मानजनक होगी, जिससे आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।


परियोजना के अंतर्गत शवदाह गृह के डिजाइन, निर्माण, संचालन और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी ईशा आउटरीच चैरिटेबल ट्रस्ट की होगी। इस दौरान फाउंडेशन की टीम ने कहा कि जैसे जीवित लोगों के प्रति हमारी जिम्मेदारियां होती हैं, वैसे ही मृतकों के प्रति भी हमारी जिम्मेदारी है कि उन्हें सम्मानजनक विदाई दी जाए।


फाउंडेशन के अनुसार, एलपीजी आधारित शवदाह प्रणाली न केवल आर्थिक रूप से किफायती है, बल्कि पर्यावरण की दृष्टि से भी टिकाऊ और अनुकूल है। इससे अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को शीघ्र, स्वच्छ और प्रभावी बनाया जा सकेगा, साथ ही दिवंगत और उनके परिजनों के लिए एक संवेदनशील और व्यवस्थित वातावरण भी उपलब्ध कराया जाएगा।


गया में इस आधुनिक शवदाह गृह के निर्माण से न केवल शहर की बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा, बल्कि यह धार्मिक आस्था और आधुनिक तकनीक के संतुलन का एक नया उदाहरण भी प्रस्तुत करेगा।

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