गया. एक बच्चा जो जन्म से ही ना सही से बोल पाता था और ना ही चल पाता था. उसकी जन्मजात विकृति का पता तब चला जब वह चलने - बोलने की उम्र में पहुंचा. बच्चे की इस अपंगता का पता चलते ही उसके माता पिता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन पति - पत्नी ने हिम्मत नहीं हारी और अपने जिगर के टुकड़े को तंदुरुस्त करने के लिए एड़ी चोटी एक कर दिया. कई शहरों में नामचीन डॉक्टरों से उसका इलाज कराया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. थक हार कर पति-पत्नी अपने बच्चे को लेकर गया शहर के जीबी रोड में आनंदीमाई मंदिर के पास स्थित बच्चों का अस्पताल पहुंचे, जहां डॉ. बीडी शर्मा ने उसका इलाज शुरु किया और आज बच्चा बेधड़क बोल भी रहा है और अपने पैरों पर चल भी रहा है. नाच भी रहा है.


इस दिव्यांग बच्चे का इलाज करनेवाले डॉ. बीडी शर्मा ने बताया कि करीब दो महीना पहले अरवल जिले के कुर्था प्रखंड के मांझीयावां गाँव के रहनेवाले मृत्युंजय कुमार अपने साढ़े छह साल के अपंग बच्चे को लेकर उनके अस्पताल में इलाज कराने आए थे. बच्चा ना तो ठीक से खड़ा हो पाता था और ना ही बोल पता था. डॉ. शर्मा ने आगे बताया कि बच्चे के माता पिता से पूर्व में कराए गए इलाज की पूरी जानकारी लेने के बाद उन्होंने ने इलाज शुरू किया और अब बच्चा बेहिचक बोल रहा है और चल भी रहा है.
इधर, बच्चे के पिता ने बताया कि उन्होंने अपने दिव्यांग बच्चे का गया, पटना से लेकर वाराणसी तक कई बड़े डॉक्टरों से इलाज करवाया, लेकिन हर जगह निराशा ही हाथ लगी. घर परिवार के लोग बच्चे के ठीक होने की उम्मीद खो चुके थे. पड़ोसी से लेकर रिश्तेदार तक उसके स्वस्थ होने की दुआ मांग रहे थे l. इसी दौरान एक परिचित के बताने पर वे आखिरी उम्मीद लेकर डॉ. बीडी शर्मा के पास पहुंचे और आज डॉक्टर साहब और उनकी टीम के अथक प्रयास और इलाज की बदौलत उनका बच्चा अन्य सामान्य बच्चों की तरह बोलने और चलने के लायक बन पाया है. इसके लिए डॉक्टर साहब एवं उनके बड़े भाई सह अस्पताल के व्यवस्थापक धर्मेंद्र कुमार का जितना भी शुक्रिया अता की जाय कम ही होगा. आज अपने बच्चे को तंदुरुस्त देख कर यह विश्वास होता है कि डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप जरूर होता है. साथ ही अस्पताल के स्टाफ अबोध कुमार, रमेश कुमार, बबलू कुमार आदि को भी उनसे मिले सहयोग के लिए साधुवाद देता हूं..


